ek kavita एक कविता
Posted by: BeM - 06-26-2018, 02:34 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

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*:::बहुत सुंदर मार्मिक ह्रदयस्पर्शी कविता:::*

*।। कोई अर्थ नहीं।।*


नित जीवन के संघर्षों से
जब टूट चुका हो अन्तर्मन,
तब सुख के मिले समन्दर का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं*।।

     जब फसल सूख कर जल के बिन
     तिनका -तिनका बन गिर जाये,
     फिर होने वाली वर्षा का
     *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन
यदि दुःख में साथ न दें अपना,
फिर सुख में उन सम्बन्धों का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

     छोटी-छोटी खुशियों के क्षण
     निकले जाते हैं रोज़ जहाँ,
     फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का
     *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

मन कटुवाणी से आहत हो
भीतर तक छलनी हो जाये,
फिर बाद कहे प्रिय वचनों का
*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

     सुख-साधन चाहे जितने हों
     पर काया रोगों का घर हो,
     फिर उन अगनित सुविधाओं का
     *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*

*~~राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर*
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Lightbulb Bhaarat Maata: Concept and Relevance भारत माता- अवधारणा व प्रासंगिकता
Posted by: Devashish - 06-23-2018, 08:50 PM - Forum: राजनीति, वर्तमान घटनाक्रम व अनिर्धारित श्रेणी Politics, Current Affairs & Uncategorised Section - No Replies

In the densely connected world, where political science jostles to define various forms of polities and political concepts, as always, the Indians for time immemorial,  have been preserving the essence of “Vasudhaiv Kutumbkam” (The world is one family), in the form of the Mother Goddess “Bhaarat Maa” “भारत माँ”. In the world torn apart by war and misery, such a philosophical polity may direct the humanity to peace and prosperity. With the aim of the same, I am trying my bit to spread the idea while alarming Indians not to lose their spiritual heritage rather try preserve and enhance it while sharing it with everyone else. 

          संघनित जुड़े हुए संसार में, जहाँ राजनीती-शास्त्र भाँति-भाँति की राजनीतियों एवं राजनैतिक अवधारणाओं को परिभाषित करने हेतु संघर्षरत है, वहीं सदैव की भाँति भारतवासी अनंतकाल से वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को समाये, भारत माँ को पूजते और सहेजे हुए हैं. कदाचित् हिंसा व दुःख से अटे पड़े इस विश्व को, ऐसे राजनैतिक दर्शन की अवधारणा, शान्ति और समृद्धि की ओर ले जाये, और साथ ही साथ, चेताते हुए निवेदन कि भारतवासी भी अपनी आध्यात्मिक सम्पदा को सहेजें एवं उसका आगे विकास कर अन्यों के साथ भी साझा करें, ऐसे विश्वास को लेकर, यह चलचित्र मेरा सूक्ष्म प्रयास है.



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  Republic TV Exposes Truth Behind Biased UN Report On Kashmir संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार सभा के अधिकारी पाकिस्तानी ISI और इस्लामिक आतंकवादियों से मिले हुए!
Posted by: Devashish - 06-21-2018, 10:09 AM - Forum: राजनीति, वर्तमान घटनाक्रम व अनिर्धारित श्रेणी Politics, Current Affairs & Uncategorised Section - No Replies

संयुक्त राष्ट्र एवं इस जैसी अन्य संस्थाओं की वास्तविकता पहचानें. Recognise the reality of United Nations and similar organisations.


 

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Bug Havan ka mahatv हवन का महत्त्व
Posted by: BeM - 06-20-2018, 11:25 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

? *हवन का महत्व* ?
_____________________
फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः ?

आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है।जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है ।तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।
गुड़ को जलाने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।
टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।
हवन की महत्ता देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च की । क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है और जीवाणु नाश होता है ?अथवा नही ? उन्होंने ग्रंथों  में वर्णिंत हवन सामग्री जुटाई और जलाने पर पाया कि ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा कि सिर्फ आम की लकड़ी १ किलो जलाने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए । पर जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बैक्टीरिया का स्तर ९४ % कम हो गया।
यही नहीं  उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया कि कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के २४ घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से ९६ प्रतिशत कम था। बार-बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था।
यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में भी दिसंबर २००७ में छप चुकी है। रिपोर्ट में लिखा गया कि हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों एवं फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का भी नाश होता है। जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है ।
?अगर चाहें तो अपने परिजनों को इस जानकारी से अवगत कराए । भगवान सभी परिजनों को सुरक्षा एवं समृद्धि  प्रदान करें ।
?????
सबका जीवन मंगलमय हो।

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Bug Havan ka mahatv हवन का महत्त्व
Posted by: BeM - 06-20-2018, 11:23 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

? *हवन का महत्व* ?
_____________________
फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः ?

आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है।जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है ।तथा वातावरण को शुद्द करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।
गुड़ को जलाने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।
टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।
हवन की महत्ता देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च की । क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्द होता है और जीवाणु नाश होता है ?अथवा नही ? उन्होंने ग्रंथों  में वर्णिंत हवन सामग्री जुटाई और जलाने पर पाया कि ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी काम किया और देखा कि सिर्फ आम की लकड़ी १ किलो जलाने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हुए । पर जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बैक्टीरिया का स्तर ९४ % कम हो गया।
यही नहीं  उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया कि कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के २४ घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से ९६ प्रतिशत कम था। बार-बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था।
यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में भी दिसंबर २००७ में छप चुकी है। रिपोर्ट में लिखा गया कि हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों एवं फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का भी नाश होता है। जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है ।
?अगर चाहें तो अपने परिजनों को इस जानकारी से अवगत कराए । भगवान सभी परिजनों को सुरक्षा एवं समृद्धि  प्रदान करें ।
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सबका जीवन मंगलमय हो।

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Exclamation Trump’s USA- A country for White Christians ONLY! ट्रम्प का यू. एस. ए. केवल श्वेत ईसाइयों के लिए!
Posted by: Devashish - 06-20-2018, 11:58 AM - Forum: राजनीति, वर्तमान घटनाक्रम व अनिर्धारित श्रेणी Politics, Current Affairs & Uncategorised Section - No Replies

              On the name of cracking down on so called ‘illegal immigration’, USA and its racially prejudiced government is making sure that ONLY white Christians are welcome and others are thrown out. Babies, little girls, old and sick, all of such ‘illegal entrants’ are being kept in makeshift jails. Many are missing now, with the bigoted and stern line taken by USA government, their fate can reasonably be considered as fatal. For legal migration, people apart from white Christians, have to face ridiculously difficult rules, fulfilling which in practice is ‘legally’ impossible.

              Even the professionals, who because of their extra-ordinary skill-sets and USA’s requirement for them, thus getting entry, face racial discrimination and most of them have to ultimately convert to Christianity if they wish to have any growth in their career or in case they aspire to hold high ranking positions. The reason behind many moderates also drifting towards such a regime in 2016 presidential election seems to be the corrupt Democratic Party, who got infiltrated and deeply entrenched by muslim fanatics and ‘far leftists’. In the end, public left with no choice but to elect someone with a less than honest credentials.   
              The population density of USA is quite less as compared to many countries around the world. They have plenty of resources and the original inhabitants of the land are already eliminated or subverted by the white Christians. Then why others are not allowed to reap benefit of that land and resources, who wish to go there and lead life abiding by the law of the land governed by constitution? That land does not belong to white Christians only or to their colored stooges! The entire world must take acknowledgement of it and make sure that injustice in USA is stopped. Illegal immigration is never supported but on the name of it, they can’t be allowed to make a white Christian ONLY zone. Their public needs to intervene in making sure that legal immigration rules are practical and honestly crafted without taking any racial prejudice into account. USA ought to share its resources with the entire world, that is a land of new world and belongs to everyone on the planet, else hand it over back to the native Americans and let them formulate their own constitution and nation and others be kicked out as “illegal immigrants/occupiers!”   

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  ek seekh एक सीख
Posted by: BeM - 06-18-2018, 11:28 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

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 ?radhey radhey?

*एक व्यक्ति ने भगवान से पूछा,,*
    *तुझे कैसे रिझाऊं मैं*
*कोई वस्तु नहीं ऐसी जिसे तुझ पर चढाऊं मैं* ...!!*
 *भगवान ने उत्तर दिया"*
*.संसार की हर वस्तु तुझे मैनें ही दी है।।*
      *""...तेरे पास अपना सिर्फ तेरा "अहंकार" है,,*
*"...जो मैनें नहीं दिया..""*

 *.उसी को तु मुझे "अर्पण" कर दे*

 *तेरा जीवन सफल हो जाएगा*

     *?सुप्रभात?*

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  jaroori bat जरूरी बात
Posted by: BeM - 06-17-2018, 11:22 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

*उच्चतम न्यायालय के एक वकील द्वारा महत्वपूर्ण सलाह*
प्रिय बंधुओं!
मैं एक महत्वपूर्ण अपेक्षा को उद्भासित करना चाहता हूँ.
??सामान्यतया हम अपने *के.वाई.सी. अर्थात नो योर कस्टमर (अपने ग्राहक को जानिए)* के तहत विभिन्न लोगों को प्रमाणिक पत्र ? जैसे "आधारकार्ड, पैनकार्ड, लाईसेंस" आदि का उपयोग करते हैं.
?? होमलोन, कार लोन, या अन्य लोन, बैंक खाता खुलवाना या नये सिमकार्ड लेने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है.
?? अधिकांश स्थानों में हमसे *स्वप्रमाणित* करने के लिए कहा जाता है और हम तुरंत अपना *हस्ताक्षर* कर उसे सौंप देते हैं.
?? अब जरा सोचें आपके वो स्वप्रमाणित दस्तावेज मुक्त रूप से उस व्यक्ति के पास है और इसका वह *किसी भी प्रकार से* उपयोग कर सकते हैं.
?? उदाहरणस्वरूप - आप का आधार कार्ड / पैनकार्ड / फोन बिल किसी *असामाजिक तत्व जैसे कि आतंकवादी* के हाथ लग गया और उसको वह *दुबारा उपयोग* कर आपके नाम से *सिमकार्ड* ले लिया तो इसमें *आतंकवादी गतिविधि में संलिप्त है* करके आप को गिरफ्तार किया जा सकता है.
?? यह वास्तव में बहुत गंभीर है और अनेक आतंकवादी मामलों में देखा गया है . सिमकार्ड विक्रेता ऐसे दस्तावेज उपलब्ध कराने के स्रोत बन कर आ रहे हैं.
?? अत: कृपया आवश्यक रूप से *आदत* बना लीजिए कि जब भी आप इस तरह के *स्वप्रमाणित के. वाई. सी. दस्तावेज* उपलब्ध करवाते हैं तो उसमें *दिनांक और उपयोग का उद्देश्य* अवश्य लिखें. ताकि उसका *दोबारा उपयोग* ना हो सके.
*?? कृपया इस पृष्ठ को अधिक से अधिक प्रसारित कीजिये जैसा कि मैंने प्रत्येक के लिए महसूस किया .??*
*?दिनांक और उद्देश्य लिखना अत्यंत आवश्यक है. ?*
1............हस्ताक्षर
2............दिनांक
3............उपयोग हेतु.
4.किसी अन्य उपयोग के लिए नहीं!
*??✅कृपया अनदेखी मत कीजिये और जितने लोगों को भेज सकते हैं भेजिए✅??*

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  ek seekh एक सीख
Posted by: BeM - 06-17-2018, 10:37 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

*पतन का कारण*

_श्रीकृष्ण ने एक रात को स्वप्न में देखा कि, एक गाय अपने नवजात बछड़े को प्रेम से चाट रही है।  चाटते-चाटते वह गाय, उस बछड़े की कोमल खाल को छील देती है । उसके शरीर से रक्त निकलने लगता है । और वह बेहोश होकर, नीचे गिर जाता है। श्रीकृष्ण प्रातः यह स्वप्न,जब अपने पिता वसूदेव  को बताते हैं । तो, वसुदेवजी  कहते हैं कि :-_

```यह स्वप्न, पंचमकाल (कलियुग) का लक्षण है ।```

*कलियुग में माता-पिता, अपनी संतान को,इतना प्रेम करेंगे, उन्हें सुविधाओं का इतना व्यसनी बना देंगे कि, वे उनमें डूबकर, अपनी ही हानि कर बैठेंगे। सुविधा, भोगी और कुमार्ग - गामी बनकर विभिन्न अज्ञानताओं में फंसकर अपने होश गँवा देंगे।*

```आजकल हो भी यही रहा है। माता पिता अपने बच्चों को, मोबाइल, बाइक, कार, कपड़े, फैशन की सामग्री और पैसे उपलब्ध करा देते हैं । बच्चों का चिंतन, इतना विषाक्त हो जाता है कि, वो माता-पिता से झूठ बोलना, बातें छिपाना,बड़ों का अपमान करना आदि सीख जाते हैं ।```

☝? *याद रखियेगा !* ??

 *संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।*
*सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए।*
*पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे।

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Rainbow Right and left दक्षिण एवं वाम पंथ (राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में)
Posted by: Devashish - 06-06-2018, 01:08 PM - Forum: राजनीति, वर्तमान घटनाक्रम व अनिर्धारित श्रेणी Politics, Current Affairs & Uncategorised Section - No Replies

Right and left
        The myriad of colours, spread across the spectra of human society qualifies to be having the essential vagueness when one tries to classify its polity. By the precedence and conventions, broadly categorised as the “Right” and “Left” in the polity, provide us a virtue to simplify political thinking in an intrinsically complex human society.
        Though not my preference, with the conventions, I assign the “Left” denotation to those inclining or being ardent to communism and the “Right” being those believing in the supremacy of merit and with a sacred sense of self respect for their ancestors and thus their “Identities.”
        In childhood, we were told in case we want to lengthen our line compared to another, we must draw ours longer rather than to erase the other line shorter and this is the path of Dharma. On the contrary, according to communism, to achieve the same target, we can adopt the strategy of erasing off the other line if it helps us in reaching the goal of equality among all. I have a strong opposition to such an idea, which essentially disrespects the merit. The ideas of left render “religion and faith” as “opium”, and thus try to “impose” their “beliefs” on masses while denouncing and disrespecting the religions and faiths, which again for me is against the birth right of a human being that is to have freedom until they are not harming others.
It’s cursory to relegate the anxiety of the people residing in a political entity for centuries and who have created for themselves a Nation that they call Motherland/Fatherland, when they express opposition to large-scale immigration and rapid alteration in their social fabric. To brand such individuals and groups as “racial”, “bigots” and what not, is unjustified keeping in mind their genuine concerns specially when the immigrants are following a death cult and want to convert everyone into the followers of their cult.
        The communist paradigm thrives on exploiting human deficiencies such as their harboring of jealousy and hatred to others and blaming by them for one’s failures or shortcomings and then classifying this “elite” as the “oppressor” and creating divisive concepts like “class-struggle” and thus igniting passions of “revolution” and “revenge”. The youth usually can’t see thru it and gets mingled in this evil design so easily and deeply that they become impervious to any sane thought against this evil design. This way, the fault lines in the society, which are nothing but natural and must be tackled by Humankind by rectifying them through peaceful social reforms (as has been in the case India), are made to deepen to the worst and violent extents. These so called “red revolutionaries” never shy away from using violence against “others”, sawing the seeds of further divisions, clashes and political instability within a society. The ultimate goal of so called communism as described by its proto propellers has never been achieved anywhere and wherever it was tried to be achieved, either those places turned into ruins or had to change their path (be it with harsh force and human-rights’ violations, like in China). Had those goals as propagated by the proto “communists” got achieved, the society then would have been in an endless cycle of violence and horror because there would remain many, who despite merit and hard work would face constant oppression and resources would never be able to sustain such an injustice to a human society that is known for its colors and vivid facets. This way, the human world would become a monochromatic den of the Devil, named as “Communism”. And would start a rotting for the end of the vivacious Human civilization, its arts, crafts, knowledge, cultures and traditions, sports, science, music, belief-systems, spiritualism, holistic health! To be continued...      

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