Lightbulb Some Famous "Best Selling" Books सर्वाधिक विक्रयित पुस्तकें
Posted by: Devashish - 03-29-2017, 02:20 AM - Forum: सौदे Deals - No Replies

Best selling books

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Star Krishna: The Man and His Philosophy (Book) कृष्ण: व्यक्तित्व व उनका दर्शन (पुस्तक)
Posted by: Devashish - 03-29-2017, 02:12 AM - Forum: सौदे Deals - No Replies

ओशो द्वारा लिखी गई पुस्तक A book written by Osho. 


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Bug Cow Tax & Vegetarianism (My Old Writings) गौ-कर व शाकाहारिता (मेरे पुराने लेख)
Posted by: Devashish - 03-29-2017, 12:58 AM - Forum: राजनीति, वर्तमान घटनाक्रम व अनिर्धारित श्रेणी Politics, Current Affairs & Uncategorised Section - No Replies

                          Happened to come across a news on a private news-channel about a tax pertaining to cows' welfare, which the channel sarcastically terming as “Cow-tax”. Editor calling it as a regressive step, cheer-leading the band wagon of hooters, self proclaimed social activists and commentators. One must ask these ungrateful folks, why they don't wish to respect and care the creature giving milk, not only to them but their children, even their parents? Is abusing Hinduism “Sanatana Dharma”, so important to them that they would write off each and every thing related with it? Do the innocent creature whom we have been exploiting for thousands of years, does not deserve to find at least a shelter and sense of gratitude from us? Many would take the line of being against such thing just to please muslim community. Is modernity and broad-mindedness all about disrespecting the sense of gratitude? None of them would dare to challenge the ban on slaughtering pigs because then those may get hurt who will blow the person off who said so or who then may not vote as a chunk to them. There grudge and hate against Sanatana Dharma won't be satisfied that way at all! Every human being should not only respect cows but also every animate or inanimate thing in the multiverse. We should always try to give the mother nature more than what we take from it. By being vegetarian, we spread the seeds of plants and don't kill them. We help their propagation simultaneously attaining our nutrition. Our mentality also become pious with remaining vegetarian. Many diseases are prevented this way. Thus we all ought to be vegetarian and respect everything around us. Make such people, who are against cow-welfare understand that being human is not just about survival, eating and mating but to garner great values about life and harness morality to achieve higher goals as a refined being.
Thanks for reading,


Devashish Narayana Mishra

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Video ped lagaauo
Posted by: BeM - 03-24-2017, 10:27 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

सन् 2095 यानी की आज से 79 साल बाद।
रितेश अपने कमरे में चुपचाप गुमसुम सा बैठा है....तभी मम्मी की तरंगे कैच होने लगती है(उस समय तक शायद मोबाईल म्यूज़ियम में दिखेंगे और ऐसे छोटे छोटे ऊँगली में फिट होने वाले गजेट्स आजायेंगे जिनका बटन ऑन करने के बाद जिस व्यक्ति के बारे में सोचेंगे उस से मानसिक तरंगो से बात शुरू हो जाएगी जैसे आजकल मोबाईल से होती है।
रितेश हलो मम्मी ...कैसी है आप???
मम्मी:--ठीक हूँ बेटा ..तू बता अभी अमेरिका में धूप निकली की नही??
रितेश:--नही मम्मी अभी कहाँ... करीब दो महीने तो हो ही गए...अभी तक अन्धेरा ही है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी हुई है की अभी एक महीने और सूरज निकलने के आसार नही है।
मम्मी:--ह्म्म्म यहाँ भी स्थिति ठीक नही है ..पिछले एक महीने से सूरज ढल ही नही रहा...85 डिग्री सेल्सियस तापमान बना हुआ है...भयंकर पराबैंगनी किरणे फैली हुई है..कल ही पडौस वाले जोशी जी का मांस पिघल कर गिरने लगा था...वो अभी भी I.C.U  में भर्ती है
रितेश :--ओह्ह तो क्या उन्हने घर पे ओजोन कवर नही लगा रखा है क्या???
मम्मी-घर पर लगवा तो रखा है पर उनकी कार का ओजोन कवर थोडा पुराना हो गया था इसलिए...उसमे छेद हो गया और पराबैगनी किरणे उनकी बॉडी से टच हो गई थी।
रितेश:--अच्छा मम्मी आपने सुना इधर एक बड़ी घटना हो गई...परसो अमेरिका के किसी कस्बे एक पौधा पाया गया...पूरी दुनिया में अफरातफरी मच गई दुनिया भर के वैज्ञानिक वहाँ इकठ्ठा हो गए काफी रिसर्च चल रही आखिर दुनिया में एक वनस्पति दिखाई देना बहुत बड़ी बात है।
मम्मी:---अच्छा बेटा तू टाईम से अपने भोजन के केप्सूल तो लेता हैं ना???और हां वो पानी वाले केप्सूल लेना मत भूलना वरना तेरी तबियत खराब हो जाएगी।
और टाईम से ऑक्सीजन लेते रहना बेटा तेरे पापा ने एक बार ऑक्सीजन लेने में लापरवाही कर दी थी पुरे फेफड़े ही बदलवाने पड़ गए...तू तो जानता ही है की अच्छे वाले फेफड़े कितने महंगे हो गए है...।
रितेश:---मम्मी अभी  बजाज के फेफड़े लांच होने वाले है जो कीमत में काफी कम है और सर्विस होंडा के फेफड़ो जैसी ही रहेगी।
और हां मम्मी आप भी याद रखना घर में तीन चार लिवर एक्स्ट्रा रखा करो.....यूँ भी दादा जी को हर तीन महीने में नया लिवर लगता ही है एकाध एक्स्ट्रा में भी रहना चाहिए कब रात बी रात जरूरत पड़ जाए।ag

आपको शायद यह मजाक लग सकता है पर अपनी आने वाली पीढ़ी को इन परिस्थितियों से बचाना है तो ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाइये और अपने दोस्तों/रिश्तेदारो/कलीग्स को भी इसके लिए प्रेरित कीजिए।

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  Navvarsh ki shubh kamanae
Posted by: BeM - 03-24-2017, 11:40 AM - Forum: अध्यात्म, धर्म, विज्ञान व तकनीकी Spirituality, Religion, Science & Technology - No Replies

*"हिन्दू नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2074 (28 मार्च, 2017)" की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।*

*चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :*

*1.* इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।

*2.* सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।

*3.* प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।  

*4.* शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।

*5.* सिख परंपरा के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी के जन्म दिवस का यही दिन है।  

*6.* स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना।

*7.* सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।

*8.* विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।

*9.* युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
10. न्याय शास्त्र के रचियता महर्षि गौत्तम का जन्मदिन दिन !

*हिन्दू नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :*

*1.* वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।

*2.* फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

*3.* नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

*हिन्दू नववर्ष कैसे मनाएँ :*

*1.* हम परस्पर एक दुसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें।

*2.* आपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।

*3 .* इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फेहराएँ।

*4.* आपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएँ।

*5.* घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ।

*6.* इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार्यक्रमों का आयोजन करें।

*आप सभी से विनम्र निवेदन है कि "हिन्दू नववर्ष" हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए "समाज को अवश्य प्रेरित" करें।*
         *  धन्यवाद *
        
       ?भारत माता की जय?

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  एक कहा नी
Posted by: BeM - 03-23-2017, 10:12 AM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

??एक बार एक किसान का घोडा बीमार हो गया।

 उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया

डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया और बोला...




"आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है।


हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं,



अगर यह ठीक हो गया तो ठीक


नहीं तो हमें इसे मारना होगा।


 क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।"



यह सब बातें पास में खड़ा
एक *बकरा* भी सुन रहा था।



*अगले दिन* डॉक्टर आया,


उसने घोड़े को दवाई दी चला गया।



उसके जाने के बाद
बकरा घोड़े केपास गया



और बोला,
"उठो दोस्त, हिम्मत करो,
नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।"



*दूसरे दिन*डॉक्टर फिर आया


और दवाई देकर चला गया।


बकरा फिर घोड़े के पास आया

और बोला,"दोस्त
तुम्हें उठना ही होगा।


हिम्मत करो
नहीं तो तुम मारे जाओगे।


मैं तुम्हारी मदद करता हूँ।
चलो उठो"



*तीसरे दिन*
जब डॉक्टर आया तो
किसान से बोला,


"मुझे अफ़सोस है कि
हमें इसे मारना पड़ेगा



क्योंकि कोई भी सुधार
नज़र नहीं आ रहा।"






जब वो वहाँ से गए तो



बकरा घोड़े के पास
फिर आया और बोला,


"देखो दोस्त,तुम्हारे लिए अब
*करो या मरो* वाली
स्थिति बन गयी है।


अगर तुम आज भी नहीं उठे
तो कल तुम मर जाओगे।


इसलिए हिम्मत करो।


हाँ, बहुत अच्छे।
थोड़ा सा और,
तुम कर सकते हो।


शाबाश,
अब भाग कर देखो,
तेज़ और तेज़।"



इतने में किसान
वापस आया तो उसने देखा

 कि उसका घोडाभाग रहा है।



वो ख़ुशी से झूम उठा


और सब घर वालों को
इकट्ठा कर के चिल्लाने लगा,



*"चमत्कार हो गया,*


*मेरा घोडा ठीक हो गया।*
*हमें जश्न मनाना चाहिए..*





आज बकरे की बिरयानी खायेंगे।"




*शिक्षा :*


*Management or

 government को*



*कभी नही पता होता कि*


*कौन employee*
*काम कर रहा है।


जो काम कर रहा होता है उसी का ही काम तमाम हो जाता है।*

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Video भाषा
Posted by: BeM - 03-23-2017, 10:03 AM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - No Replies

शायद
      बहुत कम लोग
       जानते होंगे की
       प्रसाद का अर्थ
        क्या होता है !!

                ???
           ?प्र - प्रभु  के?
          ?सा - साक्षात्?
            ?द - दर्शन?
                  ??

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है
और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है
उसके पीछे कुछ कारण है ,
अंग्रेजी भाषा में ये
बात देखने में नहीं आती |
______________________
क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए,
 क्योंकि इनके उच्चारण के समय
ध्वनि
कंठ से निकलती है।
एक बार बोल कर देखिये |

च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए,
क्योंकि इनके उच्चारण के
समय जीभ
तालू से लगती है।
एक बार बोल कर देखिये |

ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए,
क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के
मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है।
एक बार बोल कर देखिये |


त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए,
क्योंकि इनके उच्चारण के
समय
जीभ दांतों से लगती है।
एक बार बोल कर देखिये |

प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए,
क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के
मिलने
पर ही होता है। एक बार बोल
कर देखिये ।
________________________

हम अपनी भाषा पर गर्व
करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को
इसका कारण भी बताईये |
इतनी वैज्ञानिकता
दुनिया की किसी भाषा मे
नही है
जय हिन्द
क,ख,ग क्या कहता है जरा गौर करें....
••••••••••••••••••••••••••••••••••••
क - क्लेश मत करो
ख- खराब मत करो
ग- गर्व ना करो
घ- घमण्ड मत करो
च- चिँता मत करो
छ- छल-कपट मत करो
ज- जवाबदारी निभाओ
झ- झूठ मत बोलो
ट- टिप्पणी मत करो
ठ- ठगो मत
ड- डरपोक मत बनो
ढ- ढोंग ना करो
त- तैश मे मत रहो
थ- थको मत
द- दिलदार बनो
ध- धोखा मत करो
न- नम्र बनो
प- पाप मत करो
फ- फालतू काम मत करो
ब- बिगाङ मत करो
भ- भावुक बनो
म- मधुर बनो
य- यशश्वी बनो
र- रोओ मत
ल- लोभ मत करो
व- वैर मत करो
श- शत्रुता मत करो
ष- षटकोण की तरह स्थिर रहो
स- सच बोलो

ह- हँसमुख रहो
क्ष- क्षमा करो
त्र- त्रास मत करो
ज्ञ- ज्ञानी बनो !!

कृपया इस ज्ञान की जानकारी सभी को अग्रेषित करें ।

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  suvichar??????????? ☘??☘??☘??☘? मिलो किसी से ऐसे कि
Posted by: BeM - 03-23-2017, 09:43 AM - Forum: अध्यात्म, धर्म, विज्ञान व तकनीकी Spirituality, Religion, Science & Technology - No Replies

???????????
☘??☘??☘??☘?
              मिलो किसी से ऐसे कि
                 ज़िन्दगी भर की
                पहचान बन जाये,
          पड़े कदम जमीं पर ऐसे कि
                 लोगों के दिल पर
                 निशान बन जाये..
              जीने को तो ज़िन्दगी
            यहां हर कोई जी लेता है,
                      लेकिन.....
             जीयो ज़िन्दगी ऐसे कि
            औरों के लब की मुस्कान
                    बन जाये ...?

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  vichar
Posted by: BeM - 03-23-2017, 09:04 AM - Forum: अध्यात्म, धर्म, विज्ञान व तकनीकी Spirituality, Religion, Science & Technology - No Replies

*मन ही मन को जानता,मन की मन से प्रीत*
*मन ही मनमानी करे,मनही मन का मीत*
*मन झूमे,मन बावरा,मन की अद्भुत रीत*
*मन के हारे हार है,मन के जीते जीत ।।।*

?? सुप्रभात??

*जय श्रीराम* ??

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  Ek kahani
Posted by: BeM - 03-10-2017, 09:51 PM - Forum: कला, पर्यटन, रोचक तथ्य व सूचनाएँ Arts, Travel, Interesting Facts & Information - Replies (2)

*टाईम निकाल कर एक बार अवश्य पढ़े*

```एक बड़े मुल्क के राष्ट्रपति के बेडरूम की खिड़की सड़क की ओर खुलती थी। रोज़ाना हज़ारों आदमी और वाहन उस सड़क से गुज़रते थे। राष्ट्रपति इस बहाने जनता की परेशानी और दुःख-दर्द को निकट से जान लेते।

राष्ट्रपति ने एक सुबह खिड़की का परदा हटाया। भयंकर सर्दी। आसमान से गिरते रुई के फाहे। दूर-दूर तक फैली सफ़ेद चादर। अचानक उन्हें दिखा कि बेंच पर एक आदमी बैठा है। ठंड से सिकुड़ कर गठरी सा होता हुआ ।

राष्ट्रपति ने पीए को कहा -उस आदमी के बारे में जानकारी लो और उसकी ज़रूरत पूछो।

दो घंटे बाद पीए ने राष्ट्रपति को बताया - सर, वो एक भिखारी है। उसे ठंड से बचने के लिए एक अदद कंबल की ज़रूरत है।

राष्ट्रपति ने कहा -ठीक है, उसे कंबल दे दो।

अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से पर्दा हटाया। उन्हें घोर हैरानी हुई। वो भिखारी अभी भी वहां जमा है। उसके पास ओढ़ने का कंबल अभी तक नहीं है।

राष्ट्रपति गुस्सा हुए और पीए से पूछा - यह क्या है? उस भिखारी को अभी तक कंबल क्यों नहीं दिया गया?

पीए ने कहा -मैंने आपका आदेश सेक्रेटरी होम को बढ़ा दिया था। मैं अभी देखता हूं कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।

थोड़ी देर बाद सेक्रेटरी होम राष्ट्रपति के सामने पेश हुए और सफाई देते हुए बोले - सर, हमारे शहर में हज़ारों भिखारी हैं। अगर एक भिखारी को कंबल दिया तो शहर के बाकी भिखारियों को भी देना पड़ेगा और शायद पूरे मुल्क में भी। अगर न दिया तो आम आदमी और मीडिया हम पर भेदभाव का इल्ज़ाम लगायेगा।

राष्ट्रपति को गुस्सा आया - तो फिर ऐसा क्या होना चाहिए कि उस ज़रूरतमंद भिखारी को कंबल मिल जाए।

सेक्रेटरी होम ने सुझाव दिया -सर, ज़रूरतमंद तो हर भिखारी है। आपके नाम से एक 'कंबल ओढ़ाओ, भिखारी बचाओ' योजना शुरू की जाये। उसके अंतर्गत मुल्क के सारे भिखारियों को कंबल बांट दिया जाए।

राष्ट्रपति खुश हुए। अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से परदा हटाया तो देखा कि वो भिखारी अभी तक बेंच पर बैठा है। राष्ट्रपति आग-बबूला हुए। सेक्रेटरी होम तलब हुए।

उन्होंने स्पष्टीकरण दिया -सर, भिखारियों की गिनती की जा रही है ताकि उतने ही कंबल की खरीद हो सके।

राष्ट्रपति दांत पीस कर रह गए। अगली सुबह राष्ट्रपति को फिर वही भिखारी दिखा वहां। खून का घूंट पीकर रहे गए वो।
सेक्रेटरी होम की फ़ौरन पेशी हुई।

विनम्र सेक्रेटरी ने बताया -सर, ऑडिट ऑब्जेक्शन से बचने के लिए कंबल ख़रीद का शार्ट-टर्म कोटेशन डाला गया है। आज शाम तक कंबल ख़रीद हो जायेगी और रात में बांट भी दिए जाएंगे।

राष्ट्रपति ने कहा -यह आख़िरी चेतावनी है। अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की पर से परदा हटाया तो देखा बेंच के इर्द-गिर्द भीड़ जमा है। राष्ट्रपति ने पीए को भेज कर पता लगाया।

पीए ने लौट कर बताया -कंबल नहीं होने के कारण उस भिखारी की ठंड से मौत हो गयी है।

गुस्से से लाल-पीले राष्ट्रपति ने फौरन से सेक्रेटरी होम को तलब किया।

सेक्रेटरी होम ने बड़े अदब से सफाई दी -सर, खरीद की कार्यवाही पूरी हो गई थी। आनन-फानन में हमने सारे कंबल बांट भी दिए। मगर अफ़सोस कंबल कम पड़ गये।

राष्ट्रपति ने पैर पटके -आख़िर क्यों? मुझे अभी जवाब चाहिये।

सेक्रेटरी होम ने नज़रें झुकाकर बोले: श्रीमान पहले हमने कम्बल अनुसूचित जाती ओर जनजाती के लोगो को दिया. फिर अल्पसंख्यक लोगो को. फिर ओ बी सी ... करके उसने अपनी बात उनके सामने रख दी. आख़िर में जब उस भिखारी का नंबर आया तो कंबल ख़त्म हो गए।

राष्ट्रपति चिंघाड़े -आखिर में ही क्यों?

सेक्रेटरी होम ने भोलेपन से कहा -सर, इसलिये कि उस भिखारी की जाती ऊँची थी और  वह आरक्षण की श्रेणी में नही आता था, इसलिये उस को नही दे पाये ओर जब उसका नम्बर आया तो कम्बल ख़त्म हो गये.

नोट : वह बड़ा मुल्क भारत है जहाँ की योजनाएं इसी तरह चलती हैं और कहा जाता है कि भारत में सब समान हैं सबका बराबर का हक़ है।

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