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ek tathyatmik saty
#1
कृपया इस पोस्ट को धीरे-धीरे पूरा पढ़िए ??

*साक्षात्कार*

बड़ी दौड़ धूप के बाद ,
 मैं  आज एक ऑफिस में  पहुंचा,
आज मेरा पहला इंटरव्यू था ,
घर से निकलते हुए मैं  सोच रहा था,
 काश ! इंटरव्यू में आज
 कामयाब हो गया , तो अपने
 पुश्तैनी मकान को अलविदा
 कहकर यहीं शहर में सेटल हो जाऊंगा, मम्मी पापा की रोज़ की
 चिक चिक, मग़जमारी से छुटकारा मिल जायेगा ।

सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक होने वाली चिक चिक  से परेशान हो गया हूँ ।

जब सो कर उठो , तो पहले
 बिस्तर ठीक करो ,
फिर बाथरूम जाओ,
बाथरूम से निकलो तो फरमान जारी होता है
 *नल बंद कर दिया?*
*तौलिया सही जगह रखा या यूँ ही फेंक दिया?*
नाश्ता करके घर से निकलो तो डांट पडती है
*पंखा बंद किया या चल रहा है?*
क्या - क्या सुनें यार ,
 *नौकरी मिले तो घर छोड़ दूंगा..*

वहाँ उस ऑफिस में बहुत सारे उम्मीदवार बैठे थे , बॉस का इंतज़ार कर रहे थे  ।
दस बज गए  ।

 मैने देखा वहाँ आफिस में बरामदे की बत्ती अभी तक जल रही है ,
*माँ याद आ गई* , तो मैने बत्ती बुझा दी ।

ऑफिस में रखे *वाटर कूलर से पानी टपक रहा था* ,
पापा की डांट याद आ गयी , तो *पानी बन्द कर दिया ।*

बोर्ड पर लिखा था , इंटरव्यू दूसरी मंज़िल पर होगा ।

*सीढ़ी की लाइट भी जल रही थी* , बंद करके आगे बढ़ा ,
तो एक कुर्सी रास्ते में थी , *उसे हटाकर ऊपर गया* ।

 ?देखा पहले से मौजूद उम्मीदवार जाते और फ़ौरन बाहर आते ,
 पता किया तो मालूम हुआ बॉस
 फाइल लेकर कुछ पूछते नहीं ,
 वापस भेज देते हैं ।?

 नंबर आने पर मैने फाइल
 मैनेजर की तरफ बढ़ा दी ।
 कागज़ात पर नज़र दौडाने के बाद उन्होंने कहा
 *"कब ज्वाइन कर रहे हो?"*

 उनके सवाल से मुझे यूँ लगा जैसे
 मज़ाक़ हो ,
वो मेरा चेहरा देखकर कहने लगे , *ये मज़ाक़ नहीं हक़ीक़त है ।*

आज के इंटरव्यू में किसी से कुछ पूछा ही नहीं ,
*सिर्फ CCTV में सबका बर्ताव देखा* ,
*सब आये लेकिन किसी ने नल या लाइट बंद नहीं किया ।*

*धन्य हैं तुम्हारे माँ बाप , जिन्होंने तुम्हारी इतनी अच्छी परवरिश की और अच्छे संस्कार दिए ।*

*जिस इंसान के पास Self discipline नहीं वो चाहे कितना भी होशियार और चालाक हो , मैनेजमेंट और ज़िन्दगी की दौड़ धूप में कामयाब नहीं हो सकता ।*

घर पहुंचकर मम्मी पापा को गले लगाया और उनसे माफ़ी मांगकर उनका शुक्रिया अदा किया ।

*अपनी ज़िन्दगी की आजमाइश में उनकी छोटी छोटी बातों पर रोकने और टोकने से , मुझे जो सबक़ हासिल हुआ , उसके मुक़ाबले , मेरे डिग्री की कोई हैसियत नहीं थी और पता चला ज़िन्दगी के मुक़ाबले में सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही नहीं , तहज़ीब और संस्कार का भी अपना मक़ाम है...*

संसार में जीने के लिए संस्कार  जरूरी है ।

संस्कार के  लिए मां  बाप का सम्मान  जरूरी है ।

*जिन्दगी रहे ना रहे , जीवित रहने का स्वाभिमान जरूरी है ।*पोस
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